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HeydariBot (بحث | مشارکتها) |
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{{مدخل مرتبط | {{مدخل مرتبط | ||
| موضوع مرتبط = | | موضوع مرتبط = عاشورا | ||
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== مقدمه == | == مقدمه == | ||
[[روز عاشورا]]، هر یک از [[یاران]] [[حسین]] {{ع}} که میخواست به میدان [[نبرد]] آخرین برود، [[سلام]] | [[روز عاشورا]]، هر یک از [[یاران]] [[حسین]] {{ع}} که میخواست به میدان [[نبرد]] آخرین برود، [[سلام]] وداع میداد، به این صورت که: {{متن حدیث|السَّلَامُ عَلَيْكَ يَا بْنَ رَسُولِ اللَّهِ}}. و [[امام]] جواب میفرمود: {{متن حدیث|وَ عَلَيْكَ السَّلَامُ وَ نَحْنُ خَلْفَكَ}}<ref>مقتل الحسین، مقرم، ص۳۰۵.</ref>. یعنی ما هم از پی خواهیم آمد. پس از [[شهادت]] همۀ یاران امام، [[سید الشهدا]] {{ع}} به [[خیمه]] آمد و سکینه، [[زینب]]، [[ام کلثوم]] و [[فاطمه]] را ندا داد که {{متن حدیث|عَلَيْكُنَّ مِنِّي السَّلَامُ}}. این [[سلام]] وداع حضرت که دیدار پایانی وی با [[اهل بیت]] بود، [[شوری]] و سوزی در میان آنان افکند و هر کدام سخنانی گفتند<ref>بحار الأنوار، ج۴۵، ص۴۷.</ref>.<ref>[[جواد محدثی|محدثی، جواد]]، [[فرهنگ عاشورا (کتاب)|فرهنگ عاشورا]]، ص ۲۴۷.</ref> | ||
را ندا داد که {{متن حدیث|عَلَيْكُنَّ مِنِّي السَّلَامُ}}. این [[سلام]] | |||
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# [[پرونده:13681024.jpg|22px]] [[جواد محدثی|محدثی، جواد]]، [[فرهنگ عاشورا (کتاب)|'''فرهنگ عاشورا''']] | |||
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